गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

 क्यूँ जिंदगी ने आज हरा दिया,
आँसू की तरह नजरो से गिरा दिया
जिंदगी तो पल पल कल कल रगो में  बहती थी
चेहरे ही नहीं अपनी तो पलकों भी हँसती थी
फिर उसका दामन घूटा कैसे
सांसो से जुड़ा रिश्ता कैसे
जीवन हार जीत नहीं महज  संघर्ष है
  हम है ! रहेंगे  इसका ही हर्ष है
बजूद मिटता नहीं है एक हार से
जिंदगी मिटते नहीं गमो के मार से
आओ खुद का नव  निर्माण करे
अपने आप का खुद से सम्मान करे
जिंदगी अपने आप ही फिर से संवर जायेगी
सफलता अपने आप ही फिर से सर झुकायेगी

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