बुधवार, 12 मार्च 2014

पागल लड़की

एक पागल लड़की जिस से जिस से में प्यार करता हू
उसकी हर आहट का इन्ताजार करता हू 
आती नहीं है वो मेरे पास कभी
फिर भी में दीवानो कि तरह उसे प्यार करता हू
वो जब सामने आती है मेरे
तो दिन हो जाता है खुशगवार मेरा
वो सजना सवरना  नहीं जानती
फिर भी उसके मुखड़े  में रब का दीदार होता है
जिंदगी एक बेजान सी लगती थी मेरी
उसके   आने से जान आ गयी जैसे
वो जीवन को जीने का तरीका उसका
लगता है हर तरफ बहार आ गयी
 भोली सी  चंचल सी थी वो लड़की
जिसके जाते ही जिंदगी वीरान हो गयी
सोते जागते आती है ख्यालो में मेरे
कुछ लिखना भी चाहू तो याद आती है लड़की
सपनो कि दुनिया में भी उसका ही चेहरा
जिस पागल  लड़की से प्यार करता हु
एक पागल लड़की जिससे से में प्यार करता हू
उसकी हर आहात का इंतज़ार करता हू 


1 टिप्पणी:

anil uphar ने कहा…

सच तो सच ही होता है ,,इसे छुपाया नहीँ जा सकता ,,,पागल लडकी का जवाब नहीँ ।गरिमा जी वाह