बुधवार, 25 दिसंबर 2013

मानवता खो गयी कही

आज मानवता खो गयी कही
हर कोई लूटने में है लगा
कैसे हम  आगे बढे
इसी सोच में है डूबा,
लूट रही है अस्मिता नारी की
कहा रह गयी मानवता
किसी  को हो दुःख
तो लोग बना देते है मजाक
कहा है संवेदना
बड़े घरो में जो रहते है
वो और भी दुखी है
हर कोई उसका उठाता  है
फायदा  
 कहा है मानवता
 हर तरफ   है अँधियारा
कौन दीप जलाये
और जो खो रही मानवता
उसे ढूढ कर लाये