गुरुवार, 21 नवंबर 2013

बचपन

प्यारा बचपन न्यारा बचपन
और  कितना दुलारा बचपन
रोते  है हम चुप होते है
फिर  सपनो में खो जाते है,
परियो  की रानी आती है
खूब हसाती खूब खिलाती
कितना सुखमय बचपन
न  कोई चिंता न परशानी
सुनते  हम राजा की  कहानी
नानी दादी हमें सुनाती
हम न सोते  वो सो जाते
कितना भोला बचपन
बाते छोटी छोटी कहते 
सब सुन हस देते
प्यार  सभी को मिलता
ऐसा प्यारा बचपन
बचपन सुखमय होता है
प्यारा और दुलारा बचपन 

2 टिप्‍पणियां:

राजेंद्र कुमार ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति 22-11-2013 चर्चा मंच पर ।।

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
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