सोमवार, 7 अक्तूबर 2013

मॉ की महिमा निराली


मॉ की महिमा निराली होती है। नवरात्र में हर तरफ उन्ही की धूम है। पूरा देश इस समय पूजा में व्यस्त है, सभी किसी न किसी तरह से मॉ को खुश करने में लगे हुए है पर अफसोस की बात यही है कि जिसकी पूजा आज सारा संसार कर रहा है उसकी अस्मत की रक्षा कोई नहीं कर पाता है। यही बिडम्बना है कि जिस मॉ ने हमें जन्म दिया उसकी रक्षा हम नहीं कर पाते है। मॉ का नाता जन्म से नहीं सासों से होता है फिर भी कोई नहीं समझ पाता है, जो मॉ को समझने का दावा करते है क्या वो मॉ की हर बात को समझ पाते है उसकी त्याग, तपस्या, बलिदान, तप यह सोचनीय विषय है मॉ को कोई नही समझ सका है। मॉ एक अहसास है, पर कोई नही जानता । मॉ शब्द से हर कोई जुडा हुया है, खुद गीले में सोकर हमें सूखे में सुलाती है।
आज जो हो रहा है वो कितना बुरा हो रहा है, मॉ की इज्जत को तार-तार किया जा रहा है जिस मॉ ने हमें जन्म दिया उसकी स्थिति खराब कर रहे है। क्या किसी ने सोचा कि अगर लडकी न हो तो क्या मॉ मिल पायेगी। मॉ के हाथ का खाना खाकर उसके गोद में सर रखकर साने का आनंद ही कुछ अलग है। बच्चे को समाज में एक मुकाम पर पहुचाती है मॉ महान होती है।
मॉ तेरे अनेको नाम
तूझे करुू मै प्रणाम,
सब दुख सहती कुछ न कहती
तुझ से शुरु होती मेरी पहचान,
तू करुणा का सागर है,
तू ही है गीता कुरान
तुझ में है रब की शान,
तुमने हमको चलना सिखाया
इस संसार से लडना सिखाया,
तेरे गुण गाये सुबह शाम
मॉ तुझे प्रणाम।



7 टिप्‍पणियां:

अरुन शर्मा अनन्त ने कहा…

नमस्कार आपकी यह रचना कल मंगलवार (08-10-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति !!

India Darpan ने कहा…

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

जयपुर न्यूज
पर भी पधारेँ।

मदन मोहन सक्सेना ने कहा…

सुन्दर ,सरल और प्रभाबशाली रचना। बधाई।
कभी यहाँ भी पधारें।
सादर मदन

http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/
http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत बधुया प्रस्तुति |
latest post: कुछ एह्सासें !

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही सुन्दर बात कही आपने और माँ पर लिखी आपकी प्यारी सी कविता हृदयस्पर्शी है...
नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएँ...
:-)

anil uphar ने कहा…

माँ की महिमा आपकी खूब सूरत रचना है बधाई