शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

क्यों कुर्बान होती है नारी

संस्कारो की भेट चढ़ती है नारी
खुशियों की दुकान की चाभी है नारी
राष्ट्र का सम्मान  है नारी
फिर नारी होती है कुर्बान
आचल में समेटे है परिवारों की खुशिया
फिर भी सहती है सबकी बाते
लोगो को ताने भी सहती है नारी
फूल जैसी होती है नारी
घर का अभियान होती है नारी
मीठी जुबान होती है नारी
सर्जन की जननी है नारी
पर सभी का पहचान होती है नारी
गरिमा का नाम है नारी
फिर क्यों कदम कदम पर होती है कुर्बान नारी
तपस्या त्याग की पहचान है नारी
फिर भी सहती है नारी
अपमान और जिल्लत सहती है नारी
तभी वो बर्दाशत करती है हर बात को
समझो न नारी को खिलौना
अपनी पर आ जाये तो दुर्गा है नारी
उसको पास होती है उम्मीद की एक दुनिया
आचल फेलाए तो ठंडी बयार है नारी
समझो न उसको  दीन  हीन 
शक्ति का अवतार है नारी
फिर क्यों कुर्बान होती है नारी

4 टिप्‍पणियां:

Darshan jangra ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - रविवार - 22/09/2013 को
क्यों कुर्बान होती है नारी - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः21 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra





Kaushal Lal ने कहा…

शक्ति का अवतार है नारी
फिर क्यों कुर्बान होती है नारी......बहुत सुन्दर

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : अद्भुत कला है : बातिक

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति !
Latest post हे निराकार!
latest post कानून और दंड