शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

सावन में प्रेम की की बूंदे

सावन में   जब गिरती है बूँद
तो  भीग जाता है  तन मन
और नाचने लगता है,
ऐसा  लगता है  हर तरफ
छाया है प्रेम  खुमार
और सभी मस्त है सावन की
  फुहारों में,
हर फूल कली  कह रही है
सावन में भीगने का मन करता है
प्यार का  अहसास होता है
सावन में
हर कोई खुश है
सावन की बूंदों में
नदी सुमंद्र  से   मिली सावन में
  बादल   मिले बादलो से
ऐसा लगा दो  प्रेमी मिल रहे
 इस  सावन में
 

1 टिप्पणी:

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

Prakritik saundary se ot prot hokar likhi gayee rachana bahut hi khoob soorat lagi .....Sadar Abhar Garima ji .