रविवार, 25 अगस्त 2013

अयोध्या का सच

क्या है अयोध्या का सच
कौन  जाने
सब मस्त है मंदिर  की धुन मे
किसको सुध आम जनता की
नेता कहते नहीं बनेगा
संत कहते बनेगा
राम जी का ठिकाना नहीं
क्या होगा राम जी का
सब अपनी रोटी सेकते  है,
अयोध्या फिर सुर्खी में है
संत मंदिर बनवा ही लेंगे
जनता जी किसी की सुध नहीं है
सब राम में मस्त है
चनाव आ गए है
अब  संतो को याद आई
की मंदिर बनना है
सब राम का मंदिर चाहते है
पर जिन के पास घर नहीं है
उनके घर कैसे बने ये
नहीं कोई सोचता
क्या होगा राम का मंदिर बना कर
जब उसके भक्तो के पास ही
रहने को छत नहीं





सोमवार, 19 अगस्त 2013

राखी का बंधन

राखी का त्यौहार
लगता है प्यारा
भाई- बहन का प्यार
होता है सच्चा
सबसे सच्चा रिश्ता
होता है भाई - बहन का
भाई करता है हर समय
बहन की रक्षा
हर साल आता है  यह त्यौहार
और लता है खुशिया अपार
सरहद पर वीर जवानो के
लिए राखी  का बंधन
होता है अपने देश के
सरहदों को बचने के लिए
राखी है पावन  पुनीत
आओ संकल्प ले हम
इस राखी पर
बचायेंगे हर बहना की लाज 

शनिवार, 17 अगस्त 2013

पत्थरों का शहर

पत्थरों  के इस शहर में
किस  से दिल  लगाऊ
हर कोई लगाये  है चहेरे
कोई नहीं लगता है अपना
 किस से दर्द बताऊ
पत्थरों के शहर में
न दिलहै न जज्बात,
हर कोई लगता है झूठा
कैसे  हाल बताऊ
सब कोई हँसते है हम पर
का से दर्द बताऊ
पत्थरों के शहर में
हर कोई हेरान है

गुरुवार, 15 अगस्त 2013

ये कैसी स्वतंत्रता

 फिर आया १५ अगस्त
 क्या  लाया एक और दिन
न याद आते है शहीद
 और न  उनका बलिदान
बस याद आता है लडू
और    कुछ  नहीं
 क्या  यही रह गयी है  स्वतंत्रता
ये कैसी  स्वतंत्रता  है?
बच्चो  को क्या पता
क्या  होता है बलिदान
क्या है देश भावना
एक  दिन मना लेने  से
हो  जायेगा   ये दिन  पूरा
फिर हो जायेंगे हम गुलाम
और फिर कैसी  स्वतंत्रता
और क्या इस दिन का  काम 

शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

सावन में प्रेम की की बूंदे

सावन में   जब गिरती है बूँद
तो  भीग जाता है  तन मन
और नाचने लगता है,
ऐसा  लगता है  हर तरफ
छाया है प्रेम  खुमार
और सभी मस्त है सावन की
  फुहारों में,
हर फूल कली  कह रही है
सावन में भीगने का मन करता है
प्यार का  अहसास होता है
सावन में
हर कोई खुश है
सावन की बूंदों में
नदी सुमंद्र  से   मिली सावन में
  बादल   मिले बादलो से
ऐसा लगा दो  प्रेमी मिल रहे
 इस  सावन में