रविवार, 9 जून 2013

कजरारे बादल

बादल आये बादल आये
काले काले बादल आये
जब टकराते है आपस में,
तो होती है बरसात
और धरती की प्यास बुझा
देता है आकाश
जब बादल टकराते है
तो मानो दो प्रेमी एक दुसरे से बाते करते
नज़र आते है,
क्या  सुंदर नज़ारा होता है
सब तरफ खिली खिली महक होतीहै
काले बादल  एक सन्देश लाते  है
हर  तरफ बिखेरो खुशियों की चांदनी
न रहे कोई उदास
इस जमी पर
सब और बिखरी हो खुशियों की बरसात
काले बादल काले बादल
छाए है नभ के उपर




4 टिप्‍पणियां:

naturalfriend ने कहा…

kale badhal kale badhal garima didii ke pas na javo.. mere pas awoo hamem sagar par cricket ghelem..:)

Naturalfriend ने कहा…

i miss my blogger..nice poem didii,well written..;)

कालीपद प्रसाद ने कहा…

स्वगत है काले बादल का
अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
latest post: प्रेम- पहेली
LATEST POST जन्म ,मृत्यु और मोक्ष !

संजय भास्‍कर ने कहा…

आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी.....

कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-