सोमवार, 10 जून 2013

राजनीति

राजनीति का खेल निराला  होता है
हर कोई इस खेल का खिलाडी होता है
हर कोई पांच साल का  गेम में मस्त
 विचार कैसे भी हो
 मकसद एक ही है
कोई  भी हो पार्टी  
सब कर रहे देश को बर्बाद
लूट मार का हो रहा व्यापर
हर तरफ हाहाकार
पांच साल बाद आते है
और झुककर करते है सलाम
और कहते है की हम सा न
कभी हुआ  न होगा
जनता  है हेरान
क्या होगा इस देश का
कोई नहीं जानता
राजनीति का खेल निराला  होता है

4 टिप्‍पणियां:

अरुन शर्मा 'अनन्त' ने कहा…

आपकी यह रचना कल मंगलवार (11-06-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

राजेंद्र कुमार ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!

निहार रंजन ने कहा…

सच्ची बात.

रश्मि शर्मा ने कहा…

वाकई...राजनीति का खेल निराला होता है