रविवार, 19 मई 2013

पर्यावरण

  आज समय  कह रहा है
पर्यावरण बचाओ,
पेड़ पॊधे कट रहे है
वो विच्रारे कह रहे है
मुझे मत काटो
पर कोई  सुन रहा उनकी
जब  गर्मी जयादा  पड़ती है
तो ढूंढते सब पेड़ की छाव
पर कट रहे है पेड़ हमारे
सुख  रही है नदिया  
बन रहे है पत्थरों के शहर
जब   तक रहेंगे पेड़ हमारे
मिलती रहेगी छाव  हमें
हम   जा रहे है पर्यावरण से
दूर जो देता है हमें  शीतलता
पर हम न पॊधे लगाये
तो कैसी  धरती  हमारी
ये तो सोचो जीवन है उसमे
जिसे हम काट रहे है
उसका दर्द कौन  समझे
न कह पाए कोई वो किसी से
आओ हम संकल्प ले की हमें पेड़ लगाना है
तभी  होगी धरा  सुंदर
और बचेगा पर्यावरण  


सोमवार, 13 मई 2013

गर्मी

 खिड़की  से  झाकता   सूरज
 तपती  धरती आये  पसीना
गर्मी   की  है बात  निराली
 सब  होते घरो में बंद
 और लेते आम का  मजा
ना पढने की झंझट,
ना  स्कूल जाना
सूरज  देव ने  आखे  खोली
 सबको  मिला उजाला
सब करते मिल कर धमाल
गर्मी में सब  खाते  आइसक्रीम
हर मौसम  का  अपना मजा
गर्मी हो सर्दी