बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

नदी

नदी  बहती है 
दो किनारे को 
नहीं छू पाते दोनों किनारे 
 बहते रहते है,
नदी का काम  है बहना 
शांत तरीके से 
नदी और जीवन कितनी सामान   है 
जीवन भी इसी तरह बहता है 
कितने भी तूफ़ान आ जाये 
बस लड़ता रहता है 
जैसे नदी में तूफ़ान आ जाते है 
फिर भी वो बहती रहती है 
तूफानों से लड़कर 
उसी तरह जिन्दगी है 
हर तूफ़ान का सामना करती है 
हिम्मत नहीं हारती है 
 नदी से सीखना  होगा हमें 
की हिम्मत नहीं हराना कभी 
चाहे जो भी हो जाये 
नदी की तरह शांत से बहते रहना है 

1 टिप्पणी:

संजय भास्‍कर ने कहा…

एक सम्पूर्ण पोस्ट और रचना!
यही विशे्षता तो आपकी अलग से पहचान बनाती है....गरिमा जी !