शनिवार, 7 जुलाई 2012

चिड़िया
चिड़िया तू मगन घूमे मगन
कहा  जाना है नहीं पता
बोली पवन कहा है  तेरा ठिकाना
चल  ऊड  एक पेड   से दूसरे पेड  तक
जहा हो तेरे सजन
पेड़ो की डाल  पर
 नदी के  किनारे,
जहा मन हो वही
पंख फेलाकर ऊड जाना
कही  दूर  देश को,
जहा से  तुम्हे मिले
अपनी डगर
  कोई पहचान नहीं
कोई  अरमान नहीं
ऊड  रहे है आसमान में,
जा अपनी दुनिया में जा
कोई नहीं  पहचानता तुझको
जा चिड़िया  ऊड जा
अपने घर  को  फिर
हो जा मगन

1 टिप्पणी:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत ही बढ़िया


सादर