शुक्रवार, 4 मई 2012

प्रेम
प्रेम  एक शब्द है,
प्रेम एक विश्वास है
प्रेम एक फूल है,
जो कभी मुरझाता नहीं
चारो तरफ फेलता है
खुशबु
प्रेम एक चांदनी है
जो हर रहती  तरफ खिली रहती है
प्रेम एक खुशबु  है
जो  सारे जहा  महकाती  है 
फिर भी इन्सान
प्रेम को  नहीं समझ पाटा
हर समय  लड़ता है
प्रेम  से बड़ी कोई चीज़
दुनिया में नहीं है
इसी की बदोलत तो
दुनिया में अमन चैन  है
प्रेम उपासना है
पूजा है
क्रिशन  है
राधा है
मीरा है प्रेम 

3 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत खूब!


सादर

sushma 'आहुति' ने कहा…

प्यार की खुबसूरत अभिवयक्ति......

expression ने कहा…

बहुत सुंदर....

प्रेम सा कोई और एहसास नहीं.....

अनु