सोमवार, 23 अप्रैल 2012

क्या  लिखू 
आज  मन बहुत उदास है 
होने वाली कोई   बात है 
दिन  भी  बहुत  ख़राब   है,
सब कुछ उजड़ा उजड़ा है 
फिर भी लगता अपना है
क्या  लिखू कैसे लिखू 
समझ नहीं आता है 
सारी दुनिया लगती बेगानी
छाया हुआ पतझड़ है,
सब कुछ बिखरा बिखरा है,
लगता है खो जाओ कही 
अँधेरे में 
न कोई  खोज पाए 
गुम हो जाऊ किन्ही तंग गलियों में   
सब कुछ गड़बड़ सा  लग   रहा   है 
लगता है ऐसे  आ रहा है 
कोई दबे पाँव   
कौन है लगता है 
यमराज तो नहीं है 
जो  आ गया  हो लेने   मुझे   

 
 
    
 

  

1 टिप्पणी:

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

Antarmn ke dwand ko ukerti hui rachana ......mrttu ka chintan hi eeshwreey urja ka vikalp prdan karata hai .....achchhi rachana ....abhar.