सोमवार, 23 अप्रैल 2012

क्या  लिखू 
आज  मन बहुत उदास है 
होने वाली कोई   बात है 
दिन  भी  बहुत  ख़राब   है,
सब कुछ उजड़ा उजड़ा है 
फिर भी लगता अपना है
क्या  लिखू कैसे लिखू 
समझ नहीं आता है 
सारी दुनिया लगती बेगानी
छाया हुआ पतझड़ है,
सब कुछ बिखरा बिखरा है,
लगता है खो जाओ कही 
अँधेरे में 
न कोई  खोज पाए 
गुम हो जाऊ किन्ही तंग गलियों में   
सब कुछ गड़बड़ सा  लग   रहा   है 
लगता है ऐसे  आ रहा है 
कोई दबे पाँव   
कौन है लगता है 
यमराज तो नहीं है 
जो  आ गया  हो लेने   मुझे   

 
 
    
 

  

सोमवार, 16 अप्रैल 2012

आखे
कितनी प्यारी है तुम्हारी आखे
कुछ अच्छा देखती है कुछ बुरा
पर अगर आखे न हो तो
कितनी वीरान लगती है
दुनिया सारी,
आखे खुली तो सब कुछ सुहाना
और बंद हो तो रोये जमाना सारा
आखे है कितनी अनमोल
इसका नहीं कोई मोल
कितनी प्यारी चीज़ दी है भगवान ने,
पर इनसे हम देखते है,
दुनिया की बुराई,
क्यों नहीं देखते है अच्छी
बाते
जब बंद होती है हमारी आखे
तो लोग कहते है
वो अच्छा था
पर अब क्या अब
तो आखे हो गयी बंद
  
 
   
    

बुधवार, 11 अप्रैल 2012

लड़की 
लड़की क्या   होती   है 
एक   मोम   की   गुडिया  
जिसने चाह खेला और ठुकरा दिया 
क्या उसका  दिल नहीं होता,
क्या उसके अरमान नहीं होते 
क्यों सभी कहते है वो उसकी मर्जी से चले 
लड़की होना क्या गुनाह है?
तभी तो सभी उसे पसंद नहीं करते 
वो जातना नहीं जानती,
वो तो बस देना जानती है 
फिर भी सभी उसे गलत 
तरीके से देखते है,
बस उसे सबकी बात माननी है 
उसके दिल का हाल कोई नहीं समझता 
क्यों क्या उसके मर्जी नहीं होती 
लोग कब समझेंगे की 
लडकियों में भी जान होती है,
और उन्हें भी जीने का हक़ है 
  
  
     
 
  
 
क्यों टूट रहे  है रिश्ते 
मैं की भावना हो दिल में,
तो हर रिश्ता गलत लगता है 
इसी का खामियाजा सबको मिलता है 
पर हम  लोग चूर है  
सुख खोजने में
जो है उसकी कदर नहीं 
जो नहीं है उसके लिए लड़ रहे है 
इसलिए टूट रहे रिशते 
हम किसी की कदर ही नहीं करते 
आज अहम् की भावना बहुत है 
सुख की खोज बड़े घर, बड़े कार
में जा रहा है खोजा 
सब अपने में है चूर
कोई किसी नहीं चाहता है समझना 
सब मस्त है अंधी दौड़ में
जो ये समझ ले की अहम् कुछ नहीं होता 
तब रिश्ते टूटने से बच सकते है   
 
 
     

गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

खुशी को  ढूँढना 
खुशी को कौन पा पाया है
आज सभी दुखी है 
और नकली हंसी लगये घूम रहे है,
और बड़ा घर, पैसे, बड़ी कार 
पर  क्या खुशी  इसमें मिलती है,
ये बड़ा कठिन सवाल है 
खुशी तब मिलती है 
जब हम किसी की होठो पर 
ला सके मुस्कान 
जब आप किसी भूखे 
इन्सान को खाना खिलाये
तब   मिलती है खुशी 
पर आज की दुनिया में
कोई नहीं पोछता किसी  
के आसूं 
तो नकली खुशी से सब खुश है 
क्यों नहीं पाते सच्ची खुशी 

   

 
 

पिता


हर एक का ध्यान रखते 
सबको गले लगाते है 
हमारी गलतियों को माफ़ करते,
हमें सही राह दिखाते 
पापा बहुत याद आते  है,
वो हमारी तोतली बोली 
पर हर मांग हमारी पूरी करते 
गलती पर डाट लगाते 
पर मन में पछताते 
ऐसे होते है पिता 
पर सब माँ  कोई  ही देते मान 
पिता भी होते ममतामयी     
ये हम क्यों न समझ पाते


 

बुधवार, 4 अप्रैल 2012

किसान


किसान खेत में हल चलाता 
कितनी मेहनत से फसल उपजाता,
फिर भी क्यों रहता है भूखा 
ये कोई समझ न पाता,
क्यों उसके बच्चे जीते 
तंग हाल जिन्दगी 
जब की अगर किसान न हो 
तो सब रह जाये भूखे,
पर कोई समझ न पाता,
उसका दर्द वो है क्यों दुखी 
सब उसको मिलकर लूटते,
वो न कह पाता किसी से
सारे दिन हल जोतता,
पर वो न हो पाता सुखी
क्या वो इन्सान नहीं नहीं 
कोई क्यों नहीं समझ पाता

 
      
 
 

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

प्रकत्ति कितनी  ताकतवर 
प्रक्रत्ति कितनी ताकतवर है 
ये सभी  जानते है,
फिर भी उससे करते है खिलवाड़ 
प्रक्रति शांत है,
पर जब हम उसके साथ करते 
है खिलवाड़ 
प्रक्रति हरी है,
पर हम उसे सुखा रहे है 
हर तरफ मकान बनाकर,
पर जब प्रक्रति लेती है अपना बदला
तो आते है तूफ़ान,
सूखती है धरती 
पर हम इन्सान नहीं समझ 
पाते,
प्रक्रति से पंगा नहीं 
लिया जाता 
प्रक्रति से प्यार किया जाता है 
 
    
   

रविवार, 1 अप्रैल 2012

बहुत मुश्किल है


नदियों में पानी रह पाना,
पानी की बूँद बूँद बचाना 
बहुत मुश्किल है,
जंगल को बचाना,
हरियाली का रह पाना 
बहु मुश्किल है,
चिडयों का  पेड़ो पर घोशला बनाना 
बहुत मुश्किल है,
पेड जैसे कट रहे है 
कोयल का गाना 
बहुत मुश्किल है,
ठंडी हवा का चलना
मघो का बरसना 
बहुत मुश्किल है,
नदियों में कल कल की आवाज़ 
आने वाली पीढ़ी कैसे सुन पायेगी 
उन्हें नदियों का ज्ञान करना 
बहुत मुश्किल  है