शुक्रवार, 30 मार्च 2012

चुप रहना क्यों?
आज सब जगह मारामारी है 
पर हम चुप है ,
लोग पागल हो रहे है 
पर हम चुप है,
पढाई   का बुरा  हाल है  
पर हम चुप है,
हर  तरफ  दहेज का बोलबाला है 
पर हम चुप है,
जल  रही है बेटिया 
पर हम चुप है,
भूख  से जनता मर रही है 
पर हम चुप है,
हर  तरफ कालाबाजारी है 
पर हम चुप है,
क्या होगा जब   ऐसे ही चुप रहेंगे
पर हम चुप ही रहेंगे 
  

गुरुवार, 29 मार्च 2012

  बेटिया
बेटिया होती है कितनी प्यारी 
सबके आखो की राजदुलारी 
फिर भी लोग क्यों समझते है बोझ 
बेटे से जादा काम आती है बेटिया 
हर समय माँ, बेटी, बहन बनकर 
सबको प्यार देती है बेटिया 
क्यों नहीं समझते लोग इनका मोल 
हर सुख दुःख में ढाल बन   कर खड़ी है बेटिया 
फिर क्यों इन्हें मार देते है कोख में 
बेटी न रही तो क्या होगा इस समाज का 
बेटी तो घर की रौनक है 
ये कोई क्यों नहीं जानता?
बेटी को  घर  की लक्ष्मी  बनाओ 
 
 
  

रविवार, 25 मार्च 2012

पूजा में फल क्यों चढ़ाये जाते है?
पूजन में देवी-देवताओ को नेय्वेध्य के बाद फल चढ़ाये  जाते है.  फल पूरे होने का प्रतीक है फल चढ़ाकर हम अपने जीवन को सफल बनाने की कामना भगवान से करते है  मौसम के अनुसार पाच प्रकार के फल भगवान को चढ़ाये जाते है शक्ति अनुसार कम भी चढ़ा सकते है फल मीठे, रसदार, रंग और सुगंध से भरे होते है.


शुक्रवार, 23 मार्च 2012

घोटाला ही घोटाला



क्या   बात   है   अपने   देश  की  ,
हर  जगह  है  gohtala  ही  घोटाला 
कभी  चारा , तो  कभी  2G
तो  कभी   कोयला  घोटाला 
नेता  अमीर  होते   जा  रहे  है ,
किसी  को  जनता  से   कोई  लेने  देना  नहीं 
सब  घर  भर  रहे  है  अपना 
न  किसी  का  डर है  इन्हें ,
पता  नहीं  कितनी  भूख  है 
सब ले  जायेंगे  अपने  साथ 
क्या  ऐसा  होता  है ?
बच्चे  उड़ाते  है  वाइन
जनता  मर  रही  है  भूखे 
पैर  किसे  hai  खबर 
29 रूपए . कमाने वाला  भी  अमीर  हो  गया 
तो  क्यों  ने  नेता   कमाए  29 हज़ार  करोड़ 

बुधवार, 21 मार्च 2012

गर्मी
ये गर्मी क्या बात है
न कोई तिनका हरा
न पंछी की आवाज़
सुबह तो मंद बहार मिले
फिर वही तपा देती है,
पेड़ पौधे सूखने लगते है ,
बूँद बूँद को तरसते लोग
क्या  गर्मी है
सभी परेशान है 
किसान पसीना बहा कर
अपने खेत में काम कर रहे है
पर गर्मी कम होने का नाम नहीं ले रही है
सभी प्यासे है पानी के लिए
धरती भी बंजर नज़र आ रही है
 

 
 

मंगलवार, 20 मार्च 2012

दुनिया में गरीबी खत्म
२९ रुपये कमाने वाला
भी अब अमीर है,
क्या बात है
कोई गरीब नहीं
सब अमीर हो गए
पर आज नेता गरीब हो गए
क्योकि नेता तो वो भी
नहीं कमाते
उन्हें तो बस  छीनना आता है
और इस से कोई अमीर नहीं बनता है 
भारत अमीर हो गया



 

सोमवार, 19 मार्च 2012

समय बहुत बलबान
पर समय का महत्व
जिसने न जाना
वो हीरो से जीरो बन गया
हमारे देश में समय का कोई
नहीं है महत्व
समय पर जो न करता है
काम ,
समय उसकी क़द्र नहीं करता
समय बहुत है  अनमोल
बीता समय वापस नहीं आता
इसलिए हर काम करो
समय पर
नहीं तो पछताओगे
जिन्दगी भर
जिन्दगी है छोटी
और काम है बड़े
सो कैसे होंगे पूरे
अगर समय ही न रहा तो
समय का महत्व जानो
क्योकि समय बहुत बलबान        


   

शुक्रवार, 16 मार्च 2012

जंगल  कट गए
बंगले बन गए
हरी रंग की धरती
काली पीली हो गयी 
कट रहे है पेड़
गुम रहा है  जंगल
कैसे होगी बारिश
कौन देखेगा हरियाली 
रोज रोज बनते बंगले
रोज रोज कटते जंगल
क्या होगा प्रक्रति का
या तो होगी धूप
या होगी ठण्ड
जंगल ऐसे ही कटे
तो क्या होगा प्रक्रति का  
 
 

 
 
पानी 
पानी  की  हर  बूँद  है  अनमोल 
इसका  नहीं  है कोई   मोल
हर बूँद है गोल  गोल
पानी को तरसते है लोग
नहीं समझते है इसका मोल
तभी  तो बहाते है  इसे
पानी ही सब कुछ है
ये नहीं जानते है लोग
गर पानी न रहे तो प्यासे
ही रह जायेंगे लोग
पानी है जरुरत सबकी
क्यों नहीं समझते है
नदी और समुन्द्र
सब जाते है सूख
नहीं बचाया अगर पानी     
तो चिलायेगे लोग
पानी पानी पर पानी 
कहा से आएगा
ये नहीं जानते है
सब लोग 

 
 
 

सोमवार, 12 मार्च 2012

कल किसने देखा है
क्या कल कभी आता है
सब  लोग काम कल पर
देते है छोड़
क्या होता है कल
किसी ने न देखा
किसी ने न जाना
आज में जीना होता है
कल का कोई काम पूरा नहीं होता
जो लोग जीते है आज में
वाही होते है सफल
कल जिन्दगी रहे न रहे
तो सारे काम कर लो आज ही
कल क्या ठिकाना
कोई गिला न रहे हमें
की शायद ये काम आज ही
कर लिया होता पूरा
तो आज पछताना नहीं पड़ता
क्योकि कल कभी नहीं आता
तो क्यों जीते है कल में
आज ही कर लो हर तमन्ना पूरी
क्या पता कल हो न हो    
      
 
फूल क्या होता है
क्या सोचा है किसी ने
जब कली का रूप लेता है
तो कितना पायरा लगता है
और जब खिल जाता है तो
उसकी सुगंध चारो और बिखर
जाती है बिखर
और चार दिन बाद वो
जाता है मुरझा
और हो जाता है
उसका अस्तित्व्य ख़तम
ऐसे ही जीवन है
मनुष्य  का   
जन्म लिया
अपनी खुसबू बिखेरा
और मिल गया पंच्त्व्य में  
कितनी समानता  है  दोनों में
तब क्यों लड़ते है हम लोग आपस में
क्यों न फूल की तरह हम बिताये जिन्दगी को
 

शुक्रवार, 9 मार्च 2012

राजनीति में सब जायज है 
राजनीति है क्या? कभी सोचा है किसी ने मुझे तो लगता  है की एक भेड़ चाल है, जिस तरफ एक मुड़ा सब उसी तरफ हो लिए यही है राजनीति समाज को धर्म जाति के  आधार पर बाटना हर तरह के लुभावने वाद्ये करना और उसके बाद भूल जाना की हमने कोई वायदा किया था जनता से पाच साल के बाद याद आता है जनता भी कोई है जिनके वोट से हमें जीतना है, क्या करे जनता जब कुछ गलत होता है तो जाग जाती है और फिर कुछ समय के बाद सो जाती है क्या होगा ऐसे देश का है आदमी परेशान है पर क्या करे किसी को तो चुनना है एक सर्कार जाती है तो दूसरी आती है पर जनता का कोई भला नहीं होता होता कौन सोचेगा जनता के बारे में जो गरीब है वो और गरीब हो रहे है जो अमीर है वो अमीर हो रहे है ऐसी राजनीति का क्या फायदा इसलिए तो राजनीति में राजनीति में सब जायज है

शनिवार, 3 मार्च 2012

छोटा बच्चा करता जिद
होली खेलने के लिए
रंग में सबको भिगोने के लिए
पर क्या करे वो कोई नहीं है
ऐसा जिस पर रंग डाले
हर समय पूछता मम्मी से
किस पर रंग डालू में  
मम्मी कहती बेटा बाहर जाओ
सब बच्चो के साथ  खेलो
पर वो छोटा बच्चा बाहर जाने
से है  डरता  
पापा  को  है रंग लगाता
मम्मी को है डराता
होली में रंगे पुते लोगो को
देखकर डर जाता
फिर कहता धीरे से
अब न खेलूँगा में होली