शनिवार, 28 जनवरी 2012

आया  बसंत  
हर तरफ छाया 
खुशियों का वातावरण 
जाड़े से गर्मी की और 
हर तरफ पीला वातावरण 
चिड़िया चहकी फूलो  ने
भी आखे खोली 
सूरज ने  भी गर्मी दे दी 
हर जगह पीले फूलो की चादर 
बिछी हुई   लगती है 
मौसम भी मजे ले रहा है 
हर तरफ उजाला हो रहा है 
बसंत के मौसम में हर कोई 
प्रक्रति में खो जाना चाहता है   
हर कोई उल्लासित है 
नए मौसम में 
बसंत आया और
सभी और खुशिया छा गयी






   

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

देश का बड़ा  त्यौहार 
है आने वाला 
हर कोई खुश है उस  
त्यौहार को मनाने के लिए 
हर कोई रंग जाता है देश भक्ति के रंग में 
ये दिन भी आया है बड़ी मुश्किल से 
कितने लोगो ने जान गवाई
आज कोई उसका  महत्व  नहीं समझता 
सब रंगे है  अंग्रेजी fashion   में 
क्या हो गया है आज के नौजवानों  में
किसी में नहीं है देश भक्ति की भावना 
क्या होगा इस संसार का 
सभी लगे है लूटने भारत माता को 
इस को नहीं है कोई बचाने वाला 
ऐसे ही रह तो वो दिन दूर नहीं 
जब हम फिर से गुलाम हो जायेंगे

 
 

 
 

शनिवार, 7 जनवरी 2012

मौसम 4 होते है
लेकिन भारत में पाचवा भी होता है
जो चुनाव का होता है
ठण्ड में भी गर्मी का अहसास कराता है
हर पार्टी  में उठ्पतक हो रही है
जनता  हैरान   है
क्या करे क्या न करे
जिसे अच्छा समझा
वाही गलत निकल गया
sabhi ek ही  सिक्के के दो पहलू है
सब अपनी रोटी सकते है
जनता से उन्हें कोई मतलब नहीं
तभी तू पाच साल बाद जनता याद आती  है
क्या करे जनता  भी
हमेशा  ही ठगी  जताई  है
और जनता जब  ठग  जाती  है
तो उन्हें लगता है की हमने
गलत लोगो को चुन लिया
सबसे अच्छी  बात तो ये होती है
जो पढ़े लिखे लोग है
वो तो वोट डालते  ही  नहीं
और बहस करते है ये पार्टी
अच्छी है या नहीं
क्या मतलब है इसका
यही  न की बहस कर लो की ये
पार्टी अच्छी नहीं है
 वो कुछ करेंगी नहीं
क्या होगा बहस का
उससे कोई हाल तो निकलता  नहीं
बात न करके काम  करे तो जायदा
अच्छा होगा 
    
      
  
  
   

गुरुवार, 5 जनवरी 2012

बेरोजगारी का आलम  है
सारे जगह हो रहा है
लूट पाट हिंसा
सारे देश में यही हाल है
लोगो के पास पैसे नहीं है
पर रहना तो  शान से ही है
घूमना है  दोस्तों में शान दिखानी है
क्या होगा आज की पीढ़ी का
सब भटक रहे है
कोई राह दिखने वाला नहीं है
भटकते  हुए नौजवानों  को कौन  राह दिखाए  
न नौकरी   है  और न ही कोई रोकने  वाला
माँ बाप भी बेचारे क्या करे
पढ़ा दिया काबिल बना दिया
आब वो क्या करे
बच्चे माँ बाप से झूट बोलकर
लूट रहे है सारी दुनिया को
क्या यही है देश का भविष्य

   

  

मंगलवार, 3 जनवरी 2012

बज गयी चुनाव की घंटी
सब नेता लुभाने लगे जनता को
क्या होगा परिणाम ये कोई नहीं जानता
पर सभी लगे है जानता को अपनी और 
लुभाने में
जनता भी जानती है इनके वायदे
फिर भी आ जाती है इनके वायदों में
जनता का न रखते  ये ख्याल
वो तो अपनी जेब सिलाते
जनता रोये या मरे
उन्हें कोई ख्याल नहीं
वो सेकते  अपनी राजनीती की रोटिया
कोई पार्टी हो या या कोई नेता
सब एक ही तरह है
ऐसा मुखिया हो तो क्या कहना
क्या करे जनता और क्या करे नेता
 









 
 




 

रविवार, 1 जनवरी 2012

नया साल आने को है
पुराना साल जाने को है
कैसी विचित्र बात है
की पुराने के जाने का गम मनाये
नए साल के आने की ख़ुशी
पुराने साल के जाने का दरर्द है
क्योकि  उससे  जुड़ी  बहुत  यादे है
नए  साल की ख़ुशी इस लिए  है
नया साल बहुत सारी खुशिया लाने  वाला है
तो नए साल का करे स्वागत
नया साल लाये खुशियों की सौगात
पुराने का दुःख तो रहेगा ही
क्योकि यही नियम है
जो आता है उसे जाना होता है