बुधवार, 12 दिसंबर 2012

नेता / भगवान


क्या करे  नेता और भगवान की
तुलना,
 जैसे नेता इंतजार  करवाते है
  लोगो को मिलने का
उसी तरह भगवान भी
इंतजार करवाते है  अपने
 भक्तो को
बड़ी समानता  है दोनों में
नेता  तो पाच साल में अपने लोगो की
सुध ले लेते है,
पर भगवान  को तो कई साल लगते है
 मनाने में
अगर मान गए तो  समझो बात  बन गयी
और नहीं  तो सब बेकार
क्या तुलना करे हम दोनों की
दोनों है बहुत महान 

मंगलवार, 20 नवंबर 2012

पानी


पानी क्या है?
जल की धारा
जिसमे  में  मिल  जाये
हो जाये  उसकी  तरह,
तो क्यों हम नहीं  हो पाते
पानी की तरह  निर्मल,
पानी है जीवन
ये न हो तो जीवन है बेकार
 फिर भी हम नहीं समझ पाते
इसका मोल,
आदमी का जीवन पानी  की तरह
हो निर्मल  तो कितना अच्छा हो
पर हम लड़ते रहते  है,
ये जीवन मिला एक बार
तो क्यों हम व्यर्थ  गवाते है?
पानी की  तरह  हमें निर्मल
होना  होगा
तभी  ये जिन्दगी होगी सार्थक
 

शनिवार, 10 नवंबर 2012

दिवाली


दिवाली है रौशनी का त्यौहार
खुशियों  की है बहार,
  हर कोई है रौशनी में नहाया हुआ
काली  रात में जगमग होती
सारी दुनिया
फिर भी कही है खाली पन
क्या है वो
कुछ लोगो की गरीबी
कहती  है  हमारी तो क्या
दिवाली क्या होली
हमरे लिए तो सब दिन
होते एक बराबर
क्या होली क्या दिवाली
कैसी बिडम्बना है
कुछ लोग तो बढ़िया दिवाली
है मनाते
और कुछ लोग रौशनी देखकर
 खुश हो जाते जाते है

बुधवार, 7 नवंबर 2012

धूल


धूल   क्या है,
एक  छोटा सा कड
पर आख में पड़  जाये
तो आख खराब हो जाती है
क्यों  कोई उसे  कम जानता है,
 जिस तरह एक छोटा सा कड़
कही चला जाये तो उस हिस्से में
दर्द होता है
वैसे ही अगर  राजा हो  या
 रंक सब एक बराबर है
कोई   न बड़ा न कोई छोटा
किसी को दर्द दो तो दर्द  देता है
धूल हमें सीखता है की
छोटा आदमी भी उतना ही
खास होता है
 भी कुछ गुर होते है
तो अभिमान नहीं करना  चहिए,
जब आंधी  आती है तो सब खत्म हो जाता है

बुधवार, 10 अक्तूबर 2012

विश्वास


मन में है विश्वास
  लड़ जायेंगे तूफानों से,
 इस  वीरान पड़ी जिन्दगी में
कुछ पल गुदगुदाएँगे,
हम वो है जो लहरों से
भी नहीं है घबराते,
ये विश्वास है की हम
न हारेंगे कभी
न थकेंगे न रुकेंगे
आगे बढ़ते जायेंगे
है मन में यह विश्वास
रोक  न पाया कोई हमको
चाहे  आये कोई तूफ़ान ,
तूफानों में लो जलाना
है हमारा ही काम
है मन में यह विश्वास

गुरुवार, 27 सितंबर 2012

गरीबी


गरीबी क्या  है?
कुछ भी तो नहीं
जो लोग जो गरीबी
 की रेखा के नीचे है,
वो भारत शब्द का इस्तेमाल
करता है
और जो बुदीजीवी है
वो इंडिया का
क्या बात  है,
कुछ लोग अन्न के लिए
तड़पते है
और नेता कहते  है,
गरीबी खत्म
पर गरीबी खत्म कहने
पर वो अपनी रोटी कैसे सकेंगे
बस एक आश्वाशन पर
सबको  टहलाया करेंगे 

शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

माँ


माँ  भावना  है   अहसास है,
माँ जीवन है अनमोल है,
माँ बच्चे की लोरी है,
माँ अहसास है उन सुखद
पलो का,
माँ धरा है जिसकी कोई
सीमा नहीं,
आसमान है जिसे कोई
सीमा नहीं,
माँ झरना है
मीठे पानी का
माँ होती है त्याग की मूर्ति
माँ  का कोई  मोल नहीं
माँ के बिना  दुनिया  अधूरी है ,
माँ जैसा कोई हो नहीं  सकता
माँ के कदमो में स्वर्ग है,
ऐसी माँ को में कोटि कोटि वंदन
करते है 

रविवार, 19 अगस्त 2012

किसान


किसान  के हाथ  में  कुदाल
न हो  क्या  होगा?
सोचा है किसी ने
किसान जो हल चलाता  है,
उसको कितनी  मेहनत करनी
पड़ती है ,
फिर भी एक नमक की डली
के लिए उसे किसी का
मोहताज  होना पड़ता है,
क्या होगा  किसानो का,
जो अपनी धरती को
छोड़कर जा रहा है
कौन बचायेगा इन्हें
जैसे डायनासोर खत्म
हो गए वैसे ही किसान
भी ख़त्म हो जायेंगे ओए
और हर तरफ होंगे घर ही घर


रविवार, 12 अगस्त 2012

विरासत


हमें नदिया फूल
पानी सब मिला विरासत में,
 फिर हम इसे क्यों करते है बर्बाद,
ये न हो तो क्या जीवन संभव है
पर हम इन्हें बर्बाद कर रहे  है
फिर कोसते   है  भगवान को
की  बारिश  नहीं हो रही  है
सूखा पड़  रहा है,
जो हमें मिला है उसकी
हम रक्षा नहीं कर पा  रहे है,
तो भगवान् को क्यों  दोष देते है
जो हमें मिला उसकी रक्षा करे,
और पेड़ लगाये
अपनी विरासत को बचाये

गुरुवार, 2 अगस्त 2012

पानी


पानी का हो रहा व्यापर,
हर तरफ हो रह है मारामार
पानी भी बिकता है bबोलो
क्या होगा उनका जो
पीते है कोका कोला
गर पानी न हो धरती पर
तो होगा क्या
सोचा है किसी न
बिन पानी न अन्न उगेगा
न ही भोजन बनेगा
पानी ही देता है जीवन
के होगा अगर पानी न होगा
पानी जीवन है,
इसको बर्बाद न करे

बुधवार, 1 अगस्त 2012

राखी
राखी है त्योहार
प्यार और मिठास का,
भाई और बहन के प्यार का
जो अनमोल है
जिसका कोई  मोल  नहीं है
ये बंधन बहुत ही मजबूत बंधन है
इसमें प्यार भी लड़ाई भी
जब बहना चली जाती है
तो भाई सबसे ज्यदा  रोता है
लड़ता भी है,
हर बात बताता भी है
भाई बहन का ये पर्व
बहुत ही पावन  है,
ये रिश्ता हर रिश्ते
से बढ़कर  है 

शनिवार, 21 जुलाई 2012

कतार 
 हर जगह कतार  है,
फ़ोन भी बोलता है
आप कतार में है,
कब खतम होगी,
ये कतार पता  नहीं
लोग बढ़ते जा रहे है
हर तरफ मारामारी है
सबको जल्दी है,
कतार से बहार आने की
पर क्या करे कतार
इतनी लम्बी है,
 और बढती जा रही है,
चाहे वो डॉक्टर के यहाँ हो
या हो रेलवे में
अब  तो नौकरी में भी
कतार है
लोग इंतजार कर  रहे है
अपने नंबर  का
कब आएगी पता नहीं
कतार कब होगी खतम कहना
मुश्किल है 

सोमवार, 16 जुलाई 2012

 जिन्दगी

क्या है जिन्दगी
बाधा का नाम
 या जीने का नाम
लोग जिन्दगी को बोझ समझ कर जीते है
कट रही है  कहते है
क्या जिन्दगी   काटने का नाम है,
या जीने का नाम है
और जीना भी कैसा जो
किसी के काम आ सके ,
 और किसी रोते हुए के आसू
पोछ सके,
जिन्दगी बहुत खुबसूरत है,
जीना सीखो  और  किसी
के काम आना,
 जिन्दगी के केवल  रोने का
नाम नहीं है,
 हसना और मुस्कुराने का नाम है  

शनिवार, 7 जुलाई 2012

चिड़िया
चिड़िया तू मगन घूमे मगन
कहा  जाना है नहीं पता
बोली पवन कहा है  तेरा ठिकाना
चल  ऊड  एक पेड   से दूसरे पेड  तक
जहा हो तेरे सजन
पेड़ो की डाल  पर
 नदी के  किनारे,
जहा मन हो वही
पंख फेलाकर ऊड जाना
कही  दूर  देश को,
जहा से  तुम्हे मिले
अपनी डगर
  कोई पहचान नहीं
कोई  अरमान नहीं
ऊड  रहे है आसमान में,
जा अपनी दुनिया में जा
कोई नहीं  पहचानता तुझको
जा चिड़िया  ऊड जा
अपने घर  को  फिर
हो जा मगन

गुरुवार, 21 जून 2012

आसमान


आसमान  नीला होता है,
कितना विशाल होता है
इतना विशाल जिसके नीचे
सभी समा जाते   है 
ऐसे  ही  मन  होता है
 जो सब कुछ समेटे होता है
आसमान की तरह
दुःख हो या सुख
 सब कुछ छुपा लेता है
जब प्रक्रति  अपना रंग
 बदलती है तो सब बदल जाता है
आसमान नीला से काला हो जाता है
जब दुःख आता है तो,
मन  दुखी हो जाता है
सब कुछ काला लगता है
अच्छी  बाते  भी बुरी लगती है
तो  कितनी समानता है
मन और आसमान में

शुक्रवार, 15 जून 2012

नशा


नशा  क्या  है?  
नशा  जो  सब  पर  सवार होता है 
एक नशा जो शराब का होता है 
और एक जो काम का होता है,
काम का नशा सबको  होना चाहिए
और  सारे नशा बेकार  है ,
लोग अपनी जिन्दगी धुँए  में  उड़ा देते है 
और कहते है इसके  नशे  में जिन्दगी  गुजार देंगे 
नशा  तो जिन्दगी का  होना चाहिए
अगर जिन्दगी धुएं  में उड़ा दो तो 
क्या लाभ इस जिन्दगी का 
नशे से बहार आये 
और जिन्दगी   को हसीन बनाये

शुक्रवार, 25 मई 2012

हवा 
हवा क्या  है?
किसी ने देखा क्या 
 सिर्फ  महसूस  किया की हवा है 
ऐसे ही कुछ रिश्ते होते है 
जिन्हें सिर्फ महसूस किया  जा सकता है,
हवा और  रिश्ते  कितने सामान होते है  
हवा  हल्की होंती  है शीतलता  देती है 
मन को शांति प्रदान प्रदान  करती है 
कुछ रिश्ते ऐसे होते है 
जो बहुत प्यारे होते है 
जिनका वजूद कुछ नहीं होता 
पर वो होते है सबसे  अनमोल 
हवा की तरह दिखायी नहीं देते 
मन को शांति प्रदान करते है 
हवा  जिसे देखा नहीं जा सकता 
बस महसूस किया जा सकता है 



 

सोमवार, 14 मई 2012

 समय 
समय बहुत बलवान,
हर घाव भर देता है 
समय बता देता है,
की कौन सा वक़्त सही है 
समय मुझे  बताओ 
की  में कैसे किसी के 
 दुःख को कम कर दू 
समय सुनाओ उसकी कहानी 
जो दूर देश से आता था,
कैसे  सबके आसू पोछकर 
खुशिया वो विखरता था,
समय मुझ को बताओ 
की कैसे में दुनिया में खुशिया 
की रौशनी विखरा सकू 
समय तुम तो सब जानते हो,
तो कोई  गीत गुनगुना दो
जिससे अँधेरा दूर   हो  
   

शुक्रवार, 4 मई 2012

प्रेम
प्रेम  एक शब्द है,
प्रेम एक विश्वास है
प्रेम एक फूल है,
जो कभी मुरझाता नहीं
चारो तरफ फेलता है
खुशबु
प्रेम एक चांदनी है
जो हर रहती  तरफ खिली रहती है
प्रेम एक खुशबु  है
जो  सारे जहा  महकाती  है 
फिर भी इन्सान
प्रेम को  नहीं समझ पाटा
हर समय  लड़ता है
प्रेम  से बड़ी कोई चीज़
दुनिया में नहीं है
इसी की बदोलत तो
दुनिया में अमन चैन  है
प्रेम उपासना है
पूजा है
क्रिशन  है
राधा है
मीरा है प्रेम 

बुधवार, 2 मई 2012

ऐ हवा 
ऐ हवा कहा हो तुम,
कभी मेरे दर पर भी आया करो 
और दे जाया करो कुछ मीठी यादे ,
जो  सम्हाल कर रखी है तुमने 
 शाम ढलने वाली है 
और  मंद मंद हवा 
कुछ संदेसा ला रही है 
ऐ चाँद  तुम अपनी चांदनी 
की इनायत कर दो 
मेरे इस  सूने घर में 
कुछ रौशनी कर दो,
वैसे मैंने रौशनी के लिए 
चिराग भी जलाये है बहुत 
पर हवा के एक बयार से 
वो चिराग  भी बुझ गए 
ऐ हवा तुम आ जाओ 
और दे जाओ मीठी मीठी याद 
 
नारी 
नारी क्या है?
किसने जाना 
  कोई उसे देवी मानता 
तो कोई पैर की जूती 
नारी नाम है स्वाभिमान का 
न की अपमान का,
तभी तो आज नारी 
हो रही है कम 
ममता का भी हो रहा अपमान 
क्यों उसे सहना पड़ता है अपमान 
क्या वो एक इन्सान नहीं है,
क्यों वो सहे सबके अपमान 
नारी को देवी के रूप में है पूजते 
और फिर उसकी का करते है अपमान 
क्यों न हम समझे की वो भी एक इन्सान 
और उस की इज्ज़त करे 

सोमवार, 23 अप्रैल 2012

क्या  लिखू 
आज  मन बहुत उदास है 
होने वाली कोई   बात है 
दिन  भी  बहुत  ख़राब   है,
सब कुछ उजड़ा उजड़ा है 
फिर भी लगता अपना है
क्या  लिखू कैसे लिखू 
समझ नहीं आता है 
सारी दुनिया लगती बेगानी
छाया हुआ पतझड़ है,
सब कुछ बिखरा बिखरा है,
लगता है खो जाओ कही 
अँधेरे में 
न कोई  खोज पाए 
गुम हो जाऊ किन्ही तंग गलियों में   
सब कुछ गड़बड़ सा  लग   रहा   है 
लगता है ऐसे  आ रहा है 
कोई दबे पाँव   
कौन है लगता है 
यमराज तो नहीं है 
जो  आ गया  हो लेने   मुझे   

 
 
    
 

  

सोमवार, 16 अप्रैल 2012

आखे
कितनी प्यारी है तुम्हारी आखे
कुछ अच्छा देखती है कुछ बुरा
पर अगर आखे न हो तो
कितनी वीरान लगती है
दुनिया सारी,
आखे खुली तो सब कुछ सुहाना
और बंद हो तो रोये जमाना सारा
आखे है कितनी अनमोल
इसका नहीं कोई मोल
कितनी प्यारी चीज़ दी है भगवान ने,
पर इनसे हम देखते है,
दुनिया की बुराई,
क्यों नहीं देखते है अच्छी
बाते
जब बंद होती है हमारी आखे
तो लोग कहते है
वो अच्छा था
पर अब क्या अब
तो आखे हो गयी बंद
  
 
   
    

बुधवार, 11 अप्रैल 2012

लड़की 
लड़की क्या   होती   है 
एक   मोम   की   गुडिया  
जिसने चाह खेला और ठुकरा दिया 
क्या उसका  दिल नहीं होता,
क्या उसके अरमान नहीं होते 
क्यों सभी कहते है वो उसकी मर्जी से चले 
लड़की होना क्या गुनाह है?
तभी तो सभी उसे पसंद नहीं करते 
वो जातना नहीं जानती,
वो तो बस देना जानती है 
फिर भी सभी उसे गलत 
तरीके से देखते है,
बस उसे सबकी बात माननी है 
उसके दिल का हाल कोई नहीं समझता 
क्यों क्या उसके मर्जी नहीं होती 
लोग कब समझेंगे की 
लडकियों में भी जान होती है,
और उन्हें भी जीने का हक़ है 
  
  
     
 
  
 
क्यों टूट रहे  है रिश्ते 
मैं की भावना हो दिल में,
तो हर रिश्ता गलत लगता है 
इसी का खामियाजा सबको मिलता है 
पर हम  लोग चूर है  
सुख खोजने में
जो है उसकी कदर नहीं 
जो नहीं है उसके लिए लड़ रहे है 
इसलिए टूट रहे रिशते 
हम किसी की कदर ही नहीं करते 
आज अहम् की भावना बहुत है 
सुख की खोज बड़े घर, बड़े कार
में जा रहा है खोजा 
सब अपने में है चूर
कोई किसी नहीं चाहता है समझना 
सब मस्त है अंधी दौड़ में
जो ये समझ ले की अहम् कुछ नहीं होता 
तब रिश्ते टूटने से बच सकते है   
 
 
     

गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

खुशी को  ढूँढना 
खुशी को कौन पा पाया है
आज सभी दुखी है 
और नकली हंसी लगये घूम रहे है,
और बड़ा घर, पैसे, बड़ी कार 
पर  क्या खुशी  इसमें मिलती है,
ये बड़ा कठिन सवाल है 
खुशी तब मिलती है 
जब हम किसी की होठो पर 
ला सके मुस्कान 
जब आप किसी भूखे 
इन्सान को खाना खिलाये
तब   मिलती है खुशी 
पर आज की दुनिया में
कोई नहीं पोछता किसी  
के आसूं 
तो नकली खुशी से सब खुश है 
क्यों नहीं पाते सच्ची खुशी 

   

 
 

पिता


हर एक का ध्यान रखते 
सबको गले लगाते है 
हमारी गलतियों को माफ़ करते,
हमें सही राह दिखाते 
पापा बहुत याद आते  है,
वो हमारी तोतली बोली 
पर हर मांग हमारी पूरी करते 
गलती पर डाट लगाते 
पर मन में पछताते 
ऐसे होते है पिता 
पर सब माँ  कोई  ही देते मान 
पिता भी होते ममतामयी     
ये हम क्यों न समझ पाते


 

बुधवार, 4 अप्रैल 2012

किसान


किसान खेत में हल चलाता 
कितनी मेहनत से फसल उपजाता,
फिर भी क्यों रहता है भूखा 
ये कोई समझ न पाता,
क्यों उसके बच्चे जीते 
तंग हाल जिन्दगी 
जब की अगर किसान न हो 
तो सब रह जाये भूखे,
पर कोई समझ न पाता,
उसका दर्द वो है क्यों दुखी 
सब उसको मिलकर लूटते,
वो न कह पाता किसी से
सारे दिन हल जोतता,
पर वो न हो पाता सुखी
क्या वो इन्सान नहीं नहीं 
कोई क्यों नहीं समझ पाता

 
      
 
 

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

प्रकत्ति कितनी  ताकतवर 
प्रक्रत्ति कितनी ताकतवर है 
ये सभी  जानते है,
फिर भी उससे करते है खिलवाड़ 
प्रक्रति शांत है,
पर जब हम उसके साथ करते 
है खिलवाड़ 
प्रक्रति हरी है,
पर हम उसे सुखा रहे है 
हर तरफ मकान बनाकर,
पर जब प्रक्रति लेती है अपना बदला
तो आते है तूफ़ान,
सूखती है धरती 
पर हम इन्सान नहीं समझ 
पाते,
प्रक्रति से पंगा नहीं 
लिया जाता 
प्रक्रति से प्यार किया जाता है 
 
    
   

रविवार, 1 अप्रैल 2012

बहुत मुश्किल है


नदियों में पानी रह पाना,
पानी की बूँद बूँद बचाना 
बहुत मुश्किल है,
जंगल को बचाना,
हरियाली का रह पाना 
बहु मुश्किल है,
चिडयों का  पेड़ो पर घोशला बनाना 
बहुत मुश्किल है,
पेड जैसे कट रहे है 
कोयल का गाना 
बहुत मुश्किल है,
ठंडी हवा का चलना
मघो का बरसना 
बहुत मुश्किल है,
नदियों में कल कल की आवाज़ 
आने वाली पीढ़ी कैसे सुन पायेगी 
उन्हें नदियों का ज्ञान करना 
बहुत मुश्किल  है    
 

शुक्रवार, 30 मार्च 2012

चुप रहना क्यों?
आज सब जगह मारामारी है 
पर हम चुप है ,
लोग पागल हो रहे है 
पर हम चुप है,
पढाई   का बुरा  हाल है  
पर हम चुप है,
हर  तरफ  दहेज का बोलबाला है 
पर हम चुप है,
जल  रही है बेटिया 
पर हम चुप है,
भूख  से जनता मर रही है 
पर हम चुप है,
हर  तरफ कालाबाजारी है 
पर हम चुप है,
क्या होगा जब   ऐसे ही चुप रहेंगे
पर हम चुप ही रहेंगे 
  

गुरुवार, 29 मार्च 2012

  बेटिया
बेटिया होती है कितनी प्यारी 
सबके आखो की राजदुलारी 
फिर भी लोग क्यों समझते है बोझ 
बेटे से जादा काम आती है बेटिया 
हर समय माँ, बेटी, बहन बनकर 
सबको प्यार देती है बेटिया 
क्यों नहीं समझते लोग इनका मोल 
हर सुख दुःख में ढाल बन   कर खड़ी है बेटिया 
फिर क्यों इन्हें मार देते है कोख में 
बेटी न रही तो क्या होगा इस समाज का 
बेटी तो घर की रौनक है 
ये कोई क्यों नहीं जानता?
बेटी को  घर  की लक्ष्मी  बनाओ 
 
 
  

रविवार, 25 मार्च 2012

पूजा में फल क्यों चढ़ाये जाते है?
पूजन में देवी-देवताओ को नेय्वेध्य के बाद फल चढ़ाये  जाते है.  फल पूरे होने का प्रतीक है फल चढ़ाकर हम अपने जीवन को सफल बनाने की कामना भगवान से करते है  मौसम के अनुसार पाच प्रकार के फल भगवान को चढ़ाये जाते है शक्ति अनुसार कम भी चढ़ा सकते है फल मीठे, रसदार, रंग और सुगंध से भरे होते है.


शुक्रवार, 23 मार्च 2012

घोटाला ही घोटाला



क्या   बात   है   अपने   देश  की  ,
हर  जगह  है  gohtala  ही  घोटाला 
कभी  चारा , तो  कभी  2G
तो  कभी   कोयला  घोटाला 
नेता  अमीर  होते   जा  रहे  है ,
किसी  को  जनता  से   कोई  लेने  देना  नहीं 
सब  घर  भर  रहे  है  अपना 
न  किसी  का  डर है  इन्हें ,
पता  नहीं  कितनी  भूख  है 
सब ले  जायेंगे  अपने  साथ 
क्या  ऐसा  होता  है ?
बच्चे  उड़ाते  है  वाइन
जनता  मर  रही  है  भूखे 
पैर  किसे  hai  खबर 
29 रूपए . कमाने वाला  भी  अमीर  हो  गया 
तो  क्यों  ने  नेता   कमाए  29 हज़ार  करोड़ 

बुधवार, 21 मार्च 2012

गर्मी
ये गर्मी क्या बात है
न कोई तिनका हरा
न पंछी की आवाज़
सुबह तो मंद बहार मिले
फिर वही तपा देती है,
पेड़ पौधे सूखने लगते है ,
बूँद बूँद को तरसते लोग
क्या  गर्मी है
सभी परेशान है 
किसान पसीना बहा कर
अपने खेत में काम कर रहे है
पर गर्मी कम होने का नाम नहीं ले रही है
सभी प्यासे है पानी के लिए
धरती भी बंजर नज़र आ रही है
 

 
 

मंगलवार, 20 मार्च 2012

दुनिया में गरीबी खत्म
२९ रुपये कमाने वाला
भी अब अमीर है,
क्या बात है
कोई गरीब नहीं
सब अमीर हो गए
पर आज नेता गरीब हो गए
क्योकि नेता तो वो भी
नहीं कमाते
उन्हें तो बस  छीनना आता है
और इस से कोई अमीर नहीं बनता है 
भारत अमीर हो गया



 

सोमवार, 19 मार्च 2012

समय बहुत बलबान
पर समय का महत्व
जिसने न जाना
वो हीरो से जीरो बन गया
हमारे देश में समय का कोई
नहीं है महत्व
समय पर जो न करता है
काम ,
समय उसकी क़द्र नहीं करता
समय बहुत है  अनमोल
बीता समय वापस नहीं आता
इसलिए हर काम करो
समय पर
नहीं तो पछताओगे
जिन्दगी भर
जिन्दगी है छोटी
और काम है बड़े
सो कैसे होंगे पूरे
अगर समय ही न रहा तो
समय का महत्व जानो
क्योकि समय बहुत बलबान        


   

शुक्रवार, 16 मार्च 2012

जंगल  कट गए
बंगले बन गए
हरी रंग की धरती
काली पीली हो गयी 
कट रहे है पेड़
गुम रहा है  जंगल
कैसे होगी बारिश
कौन देखेगा हरियाली 
रोज रोज बनते बंगले
रोज रोज कटते जंगल
क्या होगा प्रक्रति का
या तो होगी धूप
या होगी ठण्ड
जंगल ऐसे ही कटे
तो क्या होगा प्रक्रति का  
 
 

 
 
पानी 
पानी  की  हर  बूँद  है  अनमोल 
इसका  नहीं  है कोई   मोल
हर बूँद है गोल  गोल
पानी को तरसते है लोग
नहीं समझते है इसका मोल
तभी  तो बहाते है  इसे
पानी ही सब कुछ है
ये नहीं जानते है लोग
गर पानी न रहे तो प्यासे
ही रह जायेंगे लोग
पानी है जरुरत सबकी
क्यों नहीं समझते है
नदी और समुन्द्र
सब जाते है सूख
नहीं बचाया अगर पानी     
तो चिलायेगे लोग
पानी पानी पर पानी 
कहा से आएगा
ये नहीं जानते है
सब लोग 

 
 
 

सोमवार, 12 मार्च 2012

कल किसने देखा है
क्या कल कभी आता है
सब  लोग काम कल पर
देते है छोड़
क्या होता है कल
किसी ने न देखा
किसी ने न जाना
आज में जीना होता है
कल का कोई काम पूरा नहीं होता
जो लोग जीते है आज में
वाही होते है सफल
कल जिन्दगी रहे न रहे
तो सारे काम कर लो आज ही
कल क्या ठिकाना
कोई गिला न रहे हमें
की शायद ये काम आज ही
कर लिया होता पूरा
तो आज पछताना नहीं पड़ता
क्योकि कल कभी नहीं आता
तो क्यों जीते है कल में
आज ही कर लो हर तमन्ना पूरी
क्या पता कल हो न हो    
      
 
फूल क्या होता है
क्या सोचा है किसी ने
जब कली का रूप लेता है
तो कितना पायरा लगता है
और जब खिल जाता है तो
उसकी सुगंध चारो और बिखर
जाती है बिखर
और चार दिन बाद वो
जाता है मुरझा
और हो जाता है
उसका अस्तित्व्य ख़तम
ऐसे ही जीवन है
मनुष्य  का   
जन्म लिया
अपनी खुसबू बिखेरा
और मिल गया पंच्त्व्य में  
कितनी समानता  है  दोनों में
तब क्यों लड़ते है हम लोग आपस में
क्यों न फूल की तरह हम बिताये जिन्दगी को
 

शुक्रवार, 9 मार्च 2012

राजनीति में सब जायज है 
राजनीति है क्या? कभी सोचा है किसी ने मुझे तो लगता  है की एक भेड़ चाल है, जिस तरफ एक मुड़ा सब उसी तरफ हो लिए यही है राजनीति समाज को धर्म जाति के  आधार पर बाटना हर तरह के लुभावने वाद्ये करना और उसके बाद भूल जाना की हमने कोई वायदा किया था जनता से पाच साल के बाद याद आता है जनता भी कोई है जिनके वोट से हमें जीतना है, क्या करे जनता जब कुछ गलत होता है तो जाग जाती है और फिर कुछ समय के बाद सो जाती है क्या होगा ऐसे देश का है आदमी परेशान है पर क्या करे किसी को तो चुनना है एक सर्कार जाती है तो दूसरी आती है पर जनता का कोई भला नहीं होता होता कौन सोचेगा जनता के बारे में जो गरीब है वो और गरीब हो रहे है जो अमीर है वो अमीर हो रहे है ऐसी राजनीति का क्या फायदा इसलिए तो राजनीति में राजनीति में सब जायज है

शनिवार, 3 मार्च 2012

छोटा बच्चा करता जिद
होली खेलने के लिए
रंग में सबको भिगोने के लिए
पर क्या करे वो कोई नहीं है
ऐसा जिस पर रंग डाले
हर समय पूछता मम्मी से
किस पर रंग डालू में  
मम्मी कहती बेटा बाहर जाओ
सब बच्चो के साथ  खेलो
पर वो छोटा बच्चा बाहर जाने
से है  डरता  
पापा  को  है रंग लगाता
मम्मी को है डराता
होली में रंगे पुते लोगो को
देखकर डर जाता
फिर कहता धीरे से
अब न खेलूँगा में होली 
 
 


रविवार, 26 फ़रवरी 2012

होली का त्यौहार है
कितना प्यारा, सब
तरफ है रंगों का उजियारा
हरे, गुलाबी, नीले, पीले
हर रंग की  है अदा  निराली 
जैसे कह रहा कोई कहानी
हर कोई है मस्ती में
डूब  जाना चाहता है
रंगों की मस्ती में
प्यार की बहार है
होली का त्यौहार है
गुझियो की बहार है
रंगों की बौछार है
नफरत का कोई न रंग है
सब एक दूसरे के साथ मगन है  
ठंडाई का संग है
नाचने का उमंग है
होली के संग है



शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

एक बच्चा छोटा सा
जो दुनिया के तीन पाच नहीं जानता
जब मिलता है  ऐसे लोगो से
जो गलत होते है तो वो भी उसी
रंग में रंग जाता है
क्या गलती है उअस बच्चे की
वो जो देखता है वही सीखता है
फिर क्यों कहते है लोग
की उस बच्चे को देखो
कैसे लड़ रहा है
किसने सीखाया उसे लड़ना
वो तो नहीं कही से सीख कर आया था
उसका क्या दोष
जो देखेगा वही सीखेगा
तो क्या उसे जीने का हक नहीं है
क्यों न उसे सीखाये प्यार की भाषा
तभी तो होगा अमन और चैन
न होंगे लड़ाई और न किसी से बैर  
  
   

बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

आज कुछ ऐसा लगा
की सब कुछ खास है
सुबह की पहली किरण के साथ
नयी आशाये नए सपने
एक नयी आहात दे रहे है
में जीना चाहती हु उन् सपनो में
एक नयी दुनिया में
जहा नफरत के लिए कोई जगह नहीं
हर तरफ प्यार है
भाईचारा है
सब एक दुसरे की मदद करते है
किसी को किसी से दुश्मनी नहीं है
क्या ऐसी कोई दुनिया है
जहा सिर्फ  प्यार हो
कोई नफरत न हो
सब एक दुसरे की मदद करे
नहीं यह सिर्फ सपनो में ही संभव है

बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

एक छोटी सी गुडिया प्यारी 
करती है अपनी मनमानी
न सोती न जगती है 
सबको हैरान करती है 
अपनी जिद मनवाती है 
कैसे होते है बच्चे प्यारे 
वो गुडिया है सबकी प्यारी 
पापा की तो राजदुलारी
मम्मी की है जान वो सारी
दादा दादी की राजकुमारी 
गुडिया जब सोती है 
तो वो सपने  में हसती है 
कितना  प्यारा  होता  है इनका जीवन 
न कोई चिंता न कोई फिकर 
ऐसे ही होता काश हमारा जीवन

 









रविवार, 5 फ़रवरी 2012

जिन्दगी एक किराये का घर है 
एक न एक दिन बदलना पड़ेगा 
मौत जब तुझको आवाज़ देगी 
घर से बहार निकलना पड़ेगा 
मौत का बजा जब सर पे डंका 
फूक दी पल   में सोने की लंका 
मौत जब तुझको आवाज़ देगी 
घर से बहार निकलना पड़ेगा 
देखना हो गर दिन सूनेहरा 
शाम के बाद होगा सवेरा 
पैर फूलो में रखने से पहले 
तुमको काटों पर चलना पड़ेगा 
ये जवानी है दो दिन का सपना 
ढूंढ लो साथी कोई भी अपना 
ये जवानी अगर ढल गयी तो 
हाथ हाथ मल मल के रोना पड़ेगा 
जिन्दगी एक किराये का घर है 
एक न एक दिन बदलना  पड़ेगा

'

शनिवार, 28 जनवरी 2012

आया  बसंत  
हर तरफ छाया 
खुशियों का वातावरण 
जाड़े से गर्मी की और 
हर तरफ पीला वातावरण 
चिड़िया चहकी फूलो  ने
भी आखे खोली 
सूरज ने  भी गर्मी दे दी 
हर जगह पीले फूलो की चादर 
बिछी हुई   लगती है 
मौसम भी मजे ले रहा है 
हर तरफ उजाला हो रहा है 
बसंत के मौसम में हर कोई 
प्रक्रति में खो जाना चाहता है   
हर कोई उल्लासित है 
नए मौसम में 
बसंत आया और
सभी और खुशिया छा गयी






   

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

देश का बड़ा  त्यौहार 
है आने वाला 
हर कोई खुश है उस  
त्यौहार को मनाने के लिए 
हर कोई रंग जाता है देश भक्ति के रंग में 
ये दिन भी आया है बड़ी मुश्किल से 
कितने लोगो ने जान गवाई
आज कोई उसका  महत्व  नहीं समझता 
सब रंगे है  अंग्रेजी fashion   में 
क्या हो गया है आज के नौजवानों  में
किसी में नहीं है देश भक्ति की भावना 
क्या होगा इस संसार का 
सभी लगे है लूटने भारत माता को 
इस को नहीं है कोई बचाने वाला 
ऐसे ही रह तो वो दिन दूर नहीं 
जब हम फिर से गुलाम हो जायेंगे

 
 

 
 

शनिवार, 7 जनवरी 2012

मौसम 4 होते है
लेकिन भारत में पाचवा भी होता है
जो चुनाव का होता है
ठण्ड में भी गर्मी का अहसास कराता है
हर पार्टी  में उठ्पतक हो रही है
जनता  हैरान   है
क्या करे क्या न करे
जिसे अच्छा समझा
वाही गलत निकल गया
sabhi ek ही  सिक्के के दो पहलू है
सब अपनी रोटी सकते है
जनता से उन्हें कोई मतलब नहीं
तभी तू पाच साल बाद जनता याद आती  है
क्या करे जनता  भी
हमेशा  ही ठगी  जताई  है
और जनता जब  ठग  जाती  है
तो उन्हें लगता है की हमने
गलत लोगो को चुन लिया
सबसे अच्छी  बात तो ये होती है
जो पढ़े लिखे लोग है
वो तो वोट डालते  ही  नहीं
और बहस करते है ये पार्टी
अच्छी है या नहीं
क्या मतलब है इसका
यही  न की बहस कर लो की ये
पार्टी अच्छी नहीं है
 वो कुछ करेंगी नहीं
क्या होगा बहस का
उससे कोई हाल तो निकलता  नहीं
बात न करके काम  करे तो जायदा
अच्छा होगा 
    
      
  
  
   

गुरुवार, 5 जनवरी 2012

बेरोजगारी का आलम  है
सारे जगह हो रहा है
लूट पाट हिंसा
सारे देश में यही हाल है
लोगो के पास पैसे नहीं है
पर रहना तो  शान से ही है
घूमना है  दोस्तों में शान दिखानी है
क्या होगा आज की पीढ़ी का
सब भटक रहे है
कोई राह दिखने वाला नहीं है
भटकते  हुए नौजवानों  को कौन  राह दिखाए  
न नौकरी   है  और न ही कोई रोकने  वाला
माँ बाप भी बेचारे क्या करे
पढ़ा दिया काबिल बना दिया
आब वो क्या करे
बच्चे माँ बाप से झूट बोलकर
लूट रहे है सारी दुनिया को
क्या यही है देश का भविष्य

   

  

मंगलवार, 3 जनवरी 2012

बज गयी चुनाव की घंटी
सब नेता लुभाने लगे जनता को
क्या होगा परिणाम ये कोई नहीं जानता
पर सभी लगे है जानता को अपनी और 
लुभाने में
जनता भी जानती है इनके वायदे
फिर भी आ जाती है इनके वायदों में
जनता का न रखते  ये ख्याल
वो तो अपनी जेब सिलाते
जनता रोये या मरे
उन्हें कोई ख्याल नहीं
वो सेकते  अपनी राजनीती की रोटिया
कोई पार्टी हो या या कोई नेता
सब एक ही तरह है
ऐसा मुखिया हो तो क्या कहना
क्या करे जनता और क्या करे नेता
 









 
 




 

रविवार, 1 जनवरी 2012

नया साल आने को है
पुराना साल जाने को है
कैसी विचित्र बात है
की पुराने के जाने का गम मनाये
नए साल के आने की ख़ुशी
पुराने साल के जाने का दरर्द है
क्योकि  उससे  जुड़ी  बहुत  यादे है
नए  साल की ख़ुशी इस लिए  है
नया साल बहुत सारी खुशिया लाने  वाला है
तो नए साल का करे स्वागत
नया साल लाये खुशियों की सौगात
पुराने का दुःख तो रहेगा ही
क्योकि यही नियम है
जो आता है उसे जाना होता है