बुधवार, 28 दिसंबर 2011

तलाश

किसकी तलाश है पता नहीं

कौन है पता नहीं

शायद कोई हवा है कोई

या आने वाला है कोई

नहीं जानती हूँ में

पर लगता है कोई दवे पाव आ रहा है

मेरी और

कौन है शायद मेरी मौत

किसकी तलाश है मुझे

जो पूरी नहीं हुई

लगता है कोई सुख

या नन्ही see हंसी

जो मन को खुश कर rehi है

मेरी तलाश पूरी हुई

यमराज मुझे लेने आया है

और मेरी तलाश पूरी हुई

वहा भी सब दुखी है

पर मुझे लगता है की सुख

और दुःख इसी जीवन में मिलते है

sawrag और narak इसी दुनिया में है

मेरी तलाश पूरी हुई

तलाश थी मौत की

जो यमराज लेकर चले गए


2 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत मार्मिक लिख दिया है इस बार!


सादर

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

और दुःख इसी जीवन में मिलते है

sawrag और narak इसी दुनिया में है
adhyatmik soch ke sath jeevan ka ak darshan bhi ......sundar rachana Garima ji